दोस्ती की एक नयी कहानी, dosti ki nayi kahani

Dosti ki nayi kahani

दोस्ती की एक नयी कहानी : dosti ki nayi kahani, यह हिंदी कहानी (hindi kahani) कुछ दोस्तों की है वह सभी दोस्त बहुत ही अच्छे थे सभी दोस्त साथ में वक्त बिताएं करते थे उन सभी दोस्तों को यह लगता था कि जब तक हम साथ में है तब तक हम बहुत कुछ कर सकते हैं यह बात बिल्कुल सही है जब तक हम सभी साथ में होते हैं तो हम कुछ भी कर सकते हैं.

Dosti ki nayi kahani

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dosti ki nayi kahani

क्योंकि हमें कोई भी काम करने में परेशानी नहीं होती है हमें लगता है कि जब हम साथ में हैं तो हमारी ताकत भी एक साथ ही रहती है लेकिन एक ऐसा समय भी आता है जब हमें बिछड़ना पड़ जाता है तब हमें पता चलता है कि जब तक हम चाहते तो कितना अच्छा था जब हम साथ नहीं रह पाए तो हमारे साथ कितना बुरा हो रहा है उन दोस्तों  से अलग एक ऐसा दोस्त था जो यह नहीं चाहता था कि हम साथ में रहे वह चाहता था कि हम सभी अलग हो जाएं लेकिन ऐसा क्यों करना चाहता था

 

यह बात वही जानता था एक दिन उसने ऐसा ही किया सभी की बुराइयां उसने शुरू कर दी वह कुछ दोस्तों से जाकर कुछ बातें कहता था दूसरों से भी ऐसा ही कहता था धीरे-धीरे सभी दोस्तों में मनमुटाव हो गया एक दिन ऐसा भी आ गया कि वह दोस्त बातें करना भी पसंद नहीं करते थे धीरे-धीरे सभी अच्छे दोस्त अलग हो चुके थे और वह सब कुछ हुआ था एक दोस्त की वजह से जिसने ऐसा किया था कोई भी दोस्त (dost) मिलना नहीं चाहता था और ना ही बात करना पसंद करता था धीरे-धीरे उनमें दूरियां बढ़ गई थी

 

वह अब किसी से बात करना भी पसंद (likes) नहीं करते थे जबकि सभी जानते थे कि वह बहुत अच्छे दोस्त  हैं लेकिन वह समय अब ऐसा नहीं रहा था जैसा की पहले लगता था समय बीत गया था और वह सभी परेशानियों का सामना कर रहे थे यह सब कुछ एक की वजह से हुआ था जब उसके बारे में उन्हें पता चला तो उन्होंने उसे बुलाया और पूछा कि तुमने ऐसा क्यों किया जो कि हम सभी एक अच्छे दोस्त हैं और सभी साथ में वक्त बिताएं करते थे

दोस्ती की समस्या :-

लेकिन तुम्हारी एक बात की वजह से हम सब अलग हो गए यह अच्छी बात नहीं है तुमने ऐसा क्यों किया हमें जरूर बताएं वह कहने लगा कि मेने इसलिए ऐसा किया क्योंकि तुम सभी में मुझ पर ध्यान नहीं देते थे और मुझसे कोई भी राय नहीं लेते थे जिसकी वजह से मुझे परेशानी हो रही थी मुझे ऐसा लगता था कि तुम सब को अलग हो जाना चाहिए उसके बाद तुम सबको पता चलेगा कि जब सब अलग-अलग होते हैं तो कैसा महसूस होता है मुझे भी वैसा ही महसूस हो रहा था सभी समझ गए कि हमें सभी को एक समान रखना चाहिए उसके बाद फिर से सभी दोस्त (dost) एक हो गए और सभी का ध्यान रखने लगे उन्हें पता चल चुका था कि हम सभी को एक समान ही बातों को सोचना चाहिए और सामान ही हम हैं हमें कोई भेदभाव नहीं करना चाहिए.

कहानी का मोरल :-

जीवन भी हमारा ऐसा ही अगर हम अपने जीवन में सभी को समान समझेंगे तो हमारा जीवन भी बहुत अच्छा होगा, दोस्ती की एक नयी कहानी, dosti ki nayi kahani, अगर आपको यह कहानी पसंद आई है तो आगे भी शेयर करें कमेंट करके हमें बताएं.

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